Surah 78: An-Naba — النبأ
عَمَّ يَتَسَآءَلُونَ
किस चीज़ के विषय में वे आपस में पूछ-गच्छ कर रहे है?
عَنِ ٱلنَّبَإِ ٱلْعَظِيمِ
उस बड़ी ख़बर के सम्बन्ध में,
ٱلَّذِى هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَ
जिसमें वे मतभेद रखते है
كَلَّا سَيَعْلَمُونَ
कदापि नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।
ثُمَّ كَلَّا سَيَعْلَمُونَ
फिर कदापि नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।
أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ مِهَٰدًۭا
क्या ऐसा नहीं है कि हमने धरती को बिछौना बनाया
وَٱلْجِبَالَ أَوْتَادًۭا
और पहाड़ों को मेख़े?
وَخَلَقْنَٰكُمْ أَزْوَٰجًۭا
और हमने तुम्हें जोड़-जोड़े पैदा किया,
وَجَعَلْنَا نَوْمَكُمْ سُبَاتًۭا
और तुम्हारी नींद को थकन दूर करनेवाली बनाया,
وَجَعَلْنَا ٱلَّيْلَ لِبَاسًۭا
रात को आवरण बनाया,
وَجَعَلْنَا ٱلنَّهَارَ مَعَاشًۭا
और दिन को जीवन-वृति के लिए बनाया
وَبَنَيْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعًۭا شِدَادًۭا
और तुम्हारे ऊपर सात सुदृढ़ आकाश निर्मित किए,
وَجَعَلْنَا سِرَاجًۭا وَهَّاجًۭا
और एक तप्त और प्रकाशमान प्रदीप बनाया,
وَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلْمُعْصِرَٰتِ مَآءًۭ ثَجَّاجًۭا
और बरस पड़नेवाली घटाओं से हमने मूसलाधार पानी उतारा,
لِّنُخْرِجَ بِهِۦ حَبًّۭا وَنَبَاتًۭا
ताकि हम उसके द्वारा अनाज और वनस्पति उत्पादित करें
وَجَنَّٰتٍ أَلْفَافًا
और सघन बांग़ भी।
إِنَّ يَوْمَ ٱلْفَصْلِ كَانَ مِيقَٰتًۭا
निस्संदेह फ़ैसले का दिन एक नियत समय है,
يَوْمَ يُنفَخُ فِى ٱلصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًۭا
जिस दिन नरसिंघा में फूँक मारी जाएगी, तो तुम गिरोह को गिरोह चले आओगे।
وَفُتِحَتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتْ أَبْوَٰبًۭا
और आकाश खोल दिया जाएगा तो द्वार ही द्वार हो जाएँगे;
وَسُيِّرَتِ ٱلْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًا
और पहाड़ चलाए जाएँगे, तो वे बिल्कुल मरीचिका होकर रह जाएँगे
إِنَّ جَهَنَّمَ كَانَتْ مِرْصَادًۭا
वास्तव में जहन्नम एक घात-स्थल है;
لِّلطَّٰغِينَ مَـَٔابًۭا
सरकशों का ठिकाना है
لَّٰبِثِينَ فِيهَآ أَحْقَابًۭا
वस्तुस्थिति यह है कि वे उसमें मुद्दत पर मुद्दत बिताते रहेंगे
لَّا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْدًۭا وَلَا شَرَابًا
वे उसमे न किसी शीतलता का मज़ा चखेगे और न किसी पेय का,
إِلَّا حَمِيمًۭا وَغَسَّاقًۭا
सिवाय खौलते पानी और बहती पीप-रक्त के
جَزَآءًۭ وِفَاقًا
यह बदले के रूप में उनके कर्मों के ठीक अनुकूल होगा
إِنَّهُمْ كَانُوا۟ لَا يَرْجُونَ حِسَابًۭا
वास्तव में किसी हिसाब की आशा न रखते थे,
وَكَذَّبُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَا كِذَّابًۭا
और उन्होंने हमारी आयतों को ख़ूब झुठलाया,
وَكُلَّ شَىْءٍ أَحْصَيْنَٰهُ كِتَٰبًۭا
और हमने हर चीज़ लिखकर गिन रखी है
فَذُوقُوا۟ فَلَن نَّزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَابًا
"अब चखो मज़ा कि यातना के अतिरिक्त हम तुम्हारे लिए किसी और चीज़ में बढ़ोत्तरी नहीं करेंगे। "
إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازًا
निस्सदेह डर रखनेवालों के लिए एक बड़ी सफलता है,
حَدَآئِقَ وَأَعْنَٰبًۭا
बाग़ है और अंगूर,
وَكَوَاعِبَ أَتْرَابًۭا
और नवयौवना समान उम्रवाली,
وَكَأْسًۭا دِهَاقًۭا
और छलक़ता जाम
لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًۭا وَلَا كِذَّٰبًۭا
वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न कोई झुठलाने की बात
جَزَآءًۭ مِّن رَّبِّكَ عَطَآءً حِسَابًۭا
यह तुम्हारे रब की ओर से बदला होगा, हिसाब के अनुसार प्रदत्त
رَّبِّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ٱلرَّحْمَٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًۭا
वह आकाशों और धरती का और जो कुछ उनके बीच है सबका रब है, अत्यन्त कृपाशील है, उसके सामने बात करना उनके बस में नहीं होगा
يَوْمَ يَقُومُ ٱلرُّوحُ وَٱلْمَلَٰٓئِكَةُ صَفًّۭا ۖ لَّا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ ٱلرَّحْمَٰنُ وَقَالَ صَوَابًۭا
जिस दिन रूह और फ़रिश्ते पक्तिबद्ध खड़े होंगे, वे बोलेंगे नहीं, सिवाय उस व्यक्ति के जिसे रहमान अनुमति दे और जो ठीक बात कहे
ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمُ ٱلْحَقُّ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ مَـَٔابًا
वह दिन सत्य है। अब जो कोई चाहे अपने रब की ओर रुज करे
إِنَّآ أَنذَرْنَٰكُمْ عَذَابًۭا قَرِيبًۭا يَوْمَ يَنظُرُ ٱلْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ وَيَقُولُ ٱلْكَافِرُ يَٰلَيْتَنِى كُنتُ تُرَٰبًۢا
हमने तुम्हें निकट आ लगी यातना से सावधान कर दिया है। जिस दिन मनुष्य देख लेगा जो कुछ उसके हाथों ने आगे भेजा, और इनकार करनेवाला कहेगा, "ऐ काश! कि मैं मिट्टी होता!"
Surah 79: An-Naziat — النازعات
وَٱلنَّٰزِعَٰتِ غَرْقًۭا
गवाह है वे (हवाएँ) जो ज़ोर से उखाड़ फैंके,
وَٱلنَّٰشِطَٰتِ نَشْطًۭا
और गवाह है वे (हवाएँ) जो नर्मी के साथ चलें,
وَٱلسَّٰبِحَٰتِ سَبْحًۭا
और गवाह है वे जो वायुमंडल में तैरें,
فَٱلسَّٰبِقَٰتِ سَبْقًۭا
फिर एक-दूसरे से अग्रसर हों,
فَٱلْمُدَبِّرَٰتِ أَمْرًۭا
और मामले की तदबीर करें
يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلرَّاجِفَةُ
जिस दिन हिला डालेगी हिला डालनेवाले घटना,
تَتْبَعُهَا ٱلرَّادِفَةُ
उसके पीछ घटित होगी दूसरी (घटना)
قُلُوبٌۭ يَوْمَئِذٍۢ وَاجِفَةٌ
कितने ही दिल उस दिन काँप रहे होंगे,
أَبْصَٰرُهَا خَٰشِعَةٌۭ
उनकी निगाहें झुकी होंगी
يَقُولُونَ أَءِنَّا لَمَرْدُودُونَ فِى ٱلْحَافِرَةِ
वे कहते है, "क्या वास्तव में हम पहली हालत में फिर लौटाए जाएँगे?
أَءِذَا كُنَّا عِظَٰمًۭا نَّخِرَةًۭ
क्या जब हम खोखली गलित हड्डियाँ हो चुके होंगे?"
قَالُوا۟ تِلْكَ إِذًۭا كَرَّةٌ خَاسِرَةٌۭ
वे कहते है, "तब तो लौटना बड़े ही घाटे का होगा।"
فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌۭ وَٰحِدَةٌۭ
वह तो बस एक ही झिड़की होगी,
فَإِذَا هُم بِٱلسَّاهِرَةِ
फिर क्या देखेंगे कि वे एक समतल मैदान में उपस्थित है
هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ مُوسَىٰٓ
क्या तुम्हें मूसा की ख़बर पहुँची है?
إِذْ نَادَىٰهُ رَبُّهُۥ بِٱلْوَادِ ٱلْمُقَدَّسِ طُوًى
जबकि उसके रब ने पवित्र घाटी 'तुवा' में उसे पुकारा था
ٱذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰ
कि "फ़िरऔन के पास जाओ, उसने बहुत सिर उठा रखा है
فَقُلْ هَل لَّكَ إِلَىٰٓ أَن تَزَكَّىٰ
"और कहो, क्या तू यह चाहता है कि स्वयं को पाक-साफ़ कर ले,
وَأَهْدِيَكَ إِلَىٰ رَبِّكَ فَتَخْشَىٰ
"और मैं तेरे रब की ओर तेरा मार्गदर्शन करूँ कि तु (उससे) डरे?"
فَأَرَىٰهُ ٱلْءَايَةَ ٱلْكُبْرَىٰ
फिर उसने (मूसा ने) उसको बड़ी निशानी दिखाई,
فَكَذَّبَ وَعَصَىٰ
किन्तु उसने झुठला दिया और कहा न माना,
ثُمَّ أَدْبَرَ يَسْعَىٰ
फिर सक्रियता दिखाते हुए पलटा,
فَحَشَرَ فَنَادَىٰ
फिर (लोगों को) एकत्र किया और पुकारकर कहा,
فَقَالَ أَنَا۠ رَبُّكُمُ ٱلْأَعْلَىٰ
"मैं तुम्हारा उच्चकोटि का स्वामी हूँ!"
فَأَخَذَهُ ٱللَّهُ نَكَالَ ٱلْءَاخِرَةِ وَٱلْأُولَىٰٓ
अन्ततः अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया की शिक्षाप्रद यातना में पकड़ लिया
إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَعِبْرَةًۭ لِّمَن يَخْشَىٰٓ
निस्संदेह इसमें उस व्यक्ति के लिए बड़ी शिक्षा है जो डरे!
ءَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ ٱلسَّمَآءُ ۚ بَنَىٰهَا
क्या तुम्हें पैदा करना अधिक कठिन कार्य है या आकाश को? अल्लाह ने उसे बनाया,
رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّىٰهَا
उसकी ऊँचाई को ख़ूब ऊँचा करके उसे ठीक-ठाक किया;
وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَىٰهَا
और उसकी रात को अन्धकारमय बनाया और उसका दिवस-प्रकाश प्रकट किया
وَٱلْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَىٰهَآ
और धरती को देखो! इसके पश्चात उसे फैलाया;
أَخْرَجَ مِنْهَا مَآءَهَا وَمَرْعَىٰهَا
उसमें से उसका पानी और उसका चारा निकाला
وَٱلْجِبَالَ أَرْسَىٰهَا
और पहाड़ो को देखो! उन्हें उस (धरती) में जमा दिया,
مَتَٰعًۭا لَّكُمْ وَلِأَنْعَٰمِكُمْ
तुम्हारे लिए और तुम्हारे मवेशियों के लिए जीवन-सामग्री के रूप में
فَإِذَا جَآءَتِ ٱلطَّآمَّةُ ٱلْكُبْرَىٰ
फिर जब वह महाविपदा आएगी,
يَوْمَ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَٰنُ مَا سَعَىٰ
उस दिन मनुष्य जो कुछ भी उसने प्रयास किया होगा उसे याद करेगा
وَبُرِّزَتِ ٱلْجَحِيمُ لِمَن يَرَىٰ
और भड़कती आग (जहन्नम) देखने वालों के लिए खोल दी जाएगी
فَأَمَّا مَن طَغَىٰ
तो जिस किसी ने सरकशी की
وَءَاثَرَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا
और सांसारिक जीवन को प्राथमिकता दो होगी,
فَإِنَّ ٱلْجَحِيمَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ
तो निस्संदेह भड़कती आग ही उसका ठिकाना है
وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ وَنَهَى ٱلنَّفْسَ عَنِ ٱلْهَوَىٰ
और रहा वह व्यक्ति जिसने अपने रब के सामने खड़े होने का भय रखा और अपने जी को बुरी इच्छा से रोका,
فَإِنَّ ٱلْجَنَّةَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ
तो जन्नत ही उसका ठिकाना है
يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلسَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَىٰهَا
वे तुमसे उस घड़ी के विषय में पूछते है कि वह कब आकर ठहरेगी?
فِيمَ أَنتَ مِن ذِكْرَىٰهَآ
उसके बयान करने से तुम्हारा क्या सम्बन्ध?
إِلَىٰ رَبِّكَ مُنتَهَىٰهَآ
उसकी अन्तिम पहुँच तो तेरे से ही सम्बन्ध रखती है
إِنَّمَآ أَنتَ مُنذِرُ مَن يَخْشَىٰهَا
तुम तो बस उस व्यक्ति को सावधान करनेवाले हो जो उससे डरे
كَأَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَهَا لَمْ يَلْبَثُوٓا۟ إِلَّا عَشِيَّةً أَوْ ضُحَىٰهَا
जिस दिन वे उसे देखेंगे तो (ऐसा लगेगा) मानो वे (दुनिया में) बस एक शाम या उसकी सुबह ही ठहरे है
Surah 80: Abasa — عبس
عَبَسَ وَتَوَلَّىٰٓ
उसने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया,
أَن جَآءَهُ ٱلْأَعْمَىٰ
इस कारण कि उसके पास अन्धा आ गया।
وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّهُۥ يَزَّكَّىٰٓ
और तुझे क्या मालूम शायद वह स्वयं को सँवारता-निखारता हो
أَوْ يَذَّكَّرُ فَتَنفَعَهُ ٱلذِّكْرَىٰٓ
या नसीहत हासिल करता हो तो नसीहत उसके लिए लाभदायक हो?
أَمَّا مَنِ ٱسْتَغْنَىٰ
रहा वह व्यक्ति जो धनी हो गया ह
فَأَنتَ لَهُۥ تَصَدَّىٰ
तू उसके पीछे पड़ा है -
وَمَا عَلَيْكَ أَلَّا يَزَّكَّىٰ
हालाँकि वह अपने को न निखारे तो तुझपर कोई ज़िम्मेदारी नहीं आती -
وَأَمَّا مَن جَآءَكَ يَسْعَىٰ
और रहा वह व्यक्ति जो स्वयं ही तेरे पास दौड़ता हुआ आया,
وَهُوَ يَخْشَىٰ
और वह डरता भी है,
فَأَنتَ عَنْهُ تَلَهَّىٰ
तो तू उससे बेपरवाई करता है
كَلَّآ إِنَّهَا تَذْكِرَةٌۭ
कदापि नहीं, वे (आयतें) तो महत्वपूर्ण नसीहत है -
فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ
तो जो चाहे उसे याद कर ले -
فِى صُحُفٍۢ مُّكَرَّمَةٍۢ
पवित्र पन्नों में अंकित है,
مَّرْفُوعَةٍۢ مُّطَهَّرَةٍۭ
प्रतिष्ठि्त, उच्च,
بِأَيْدِى سَفَرَةٍۢ
ऐसे कातिबों के हाथों में रहा करते है
كِرَامٍۭ بَرَرَةٍۢ
जो प्रतिष्ठित और नेक है
قُتِلَ ٱلْإِنسَٰنُ مَآ أَكْفَرَهُۥ
विनष्ट हुआ मनुष्य! कैसा अकृतज्ञ है!
مِنْ أَىِّ شَىْءٍ خَلَقَهُۥ
उसको किस चीज़ से पैदा किया?
مِن نُّطْفَةٍ خَلَقَهُۥ فَقَدَّرَهُۥ
तनिक-सी बूँद से उसको पैदा किया, तो उसके लिए एक अंदाजा ठहराया,
ثُمَّ ٱلسَّبِيلَ يَسَّرَهُۥ
फिर मार्ग को देखो, उसे सुगम कर दिया,
ثُمَّ أَمَاتَهُۥ فَأَقْبَرَهُۥ
फिर उसे मृत्यु दी और क्रब में उसे रखवाया,
ثُمَّ إِذَا شَآءَ أَنشَرَهُۥ
फिर जब चाहेगा उसे (जीवित करके) उठा खड़ा करेगा। -
كَلَّا لَمَّا يَقْضِ مَآ أَمَرَهُۥ
कदापि नहीं, उसने उसको पूरा नहीं किया जिसका आदेश अल्लाह ने उसे दिया है
فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَٰنُ إِلَىٰ طَعَامِهِۦٓ
अतः मनुष्य को चाहिए कि अपने भोजन को देखे,
أَنَّا صَبَبْنَا ٱلْمَآءَ صَبًّۭا
कि हमने ख़ूब पानी बरसाया,
ثُمَّ شَقَقْنَا ٱلْأَرْضَ شَقًّۭا
फिर धरती को विशेष रूप से फाड़ा,
فَأَنۢبَتْنَا فِيهَا حَبًّۭا
फिर हमने उसमें उगाए अनाज,
وَعِنَبًۭا وَقَضْبًۭا
और अंगूर और तरकारी,
وَزَيْتُونًۭا وَنَخْلًۭا
और ज़ैतून और खजूर,
وَحَدَآئِقَ غُلْبًۭا
और घने बाग़,
وَفَٰكِهَةًۭ وَأَبًّۭا
और मेवे और घास-चारा,
مَّتَٰعًۭا لَّكُمْ وَلِأَنْعَٰمِكُمْ
तुम्हारे लिए और तुम्हारे चौपायों के लिेए जीवन-सामग्री के रूप में
فَإِذَا جَآءَتِ ٱلصَّآخَّةُ
फिर जब वह बहरा कर देनेवाली प्रचंड आवाज़ आएगी,
يَوْمَ يَفِرُّ ٱلْمَرْءُ مِنْ أَخِيهِ
जिस दिन आदमी भागेगा अपने भाई से,
وَأُمِّهِۦ وَأَبِيهِ
और अपनी माँ और अपने बाप से,
وَصَٰحِبَتِهِۦ وَبَنِيهِ
और अपनी पत्नी और अपने बेटों से
لِكُلِّ ٱمْرِئٍۢ مِّنْهُمْ يَوْمَئِذٍۢ شَأْنٌۭ يُغْنِيهِ
उनमें से प्रत्येक व्यक्ति को उस दिन ऐसी पड़ी होगी जो उसे दूसरों से बेपरवाह कर देगी
وُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍۢ مُّسْفِرَةٌۭ
कितने ही चेहरे उस दिन रौशन होंगे,
ضَاحِكَةٌۭ مُّسْتَبْشِرَةٌۭ
हँसते, प्रफुल्लित
وَوُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍ عَلَيْهَا غَبَرَةٌۭ
और कितने ही चेहरे होंगे जिनपर उस दिन धूल पड़ी होगी,
تَرْهَقُهَا قَتَرَةٌ
उनपर कलौंस छा रही होगी
أُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلْكَفَرَةُ ٱلْفَجَرَةُ
वहीं होंगे इनकार करनेवाले दुराचारी लोग!
Surah 81: At-Takwir — التكوير
إِذَا ٱلشَّمْسُ كُوِّرَتْ
जब सूर्य लपेट दिया जाएगा,
وَإِذَا ٱلنُّجُومُ ٱنكَدَرَتْ
सारे तारे मैले हो जाएँगे,
وَإِذَا ٱلْجِبَالُ سُيِّرَتْ
जब पहाड़ चलाए जाएँगे,
وَإِذَا ٱلْعِشَارُ عُطِّلَتْ
जब दस मास की गाभिन ऊँटनियाँ आज़ाद छोड़ दी जाएँगी,
وَإِذَا ٱلْوُحُوشُ حُشِرَتْ
जब जंगली जानवर एकत्र किए जाएँगे,
وَإِذَا ٱلْبِحَارُ سُجِّرَتْ
जब समुद्र भड़का दिया जाएँगे,
وَإِذَا ٱلنُّفُوسُ زُوِّجَتْ
जब लोग क़िस्म-क़िस्म कर दिए जाएँगे,
وَإِذَا ٱلْمَوْءُۥدَةُ سُئِلَتْ
और जब जीवित गाड़ी गई लड़की से पूछा जाएगा,
بِأَىِّ ذَنۢبٍۢ قُتِلَتْ
कि उसकी हत्या किस गुनाह के कारण की गई,
وَإِذَا ٱلصُّحُفُ نُشِرَتْ
और जब कर्म-पत्र फैला दिए जाएँगे,
وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ كُشِطَتْ
और जब आकाश की खाल उतार दी जाएगी,
وَإِذَا ٱلْجَحِيمُ سُعِّرَتْ
जब जहन्नम को दहकाया जाएगा,
وَإِذَا ٱلْجَنَّةُ أُزْلِفَتْ
और जब जन्नत निकट कर दी जाएगी,
عَلِمَتْ نَفْسٌۭ مَّآ أَحْضَرَتْ
तो कोई भी क्यक्ति जान लेगा कि उसने क्या उपस्थित किया है
فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلْخُنَّسِ
अतः नहीं! मैं क़सम खाता हूँ पीछे हटनेवालों की,
ٱلْجَوَارِ ٱلْكُنَّسِ
चलनेवालों, छिपने-दुबकने-वालों की
وَٱلَّيْلِ إِذَا عَسْعَسَ
साक्षी है रात्रि जब वह प्रस्थान करे,
وَٱلصُّبْحِ إِذَا تَنَفَّسَ
और साक्षी है प्रातः जब वह साँस ले
إِنَّهُۥ لَقَوْلُ رَسُولٍۢ كَرِيمٍۢ
निश्चय ही वह एक आदरणीय संदेशवाहक की लाई हुई वाणी है,
ذِى قُوَّةٍ عِندَ ذِى ٱلْعَرْشِ مَكِينٍۢ
जो शक्तिवाला है, सिंहासनवाले के यहाँ जिसकी पैठ है
مُّطَاعٍۢ ثَمَّ أَمِينٍۢ
उसका आदेश माना जाता है, वहाँ वह विश्वासपात्र है
وَمَا صَاحِبُكُم بِمَجْنُونٍۢ
तुम्हारा साथी कोई दीवाना नहीं,
وَلَقَدْ رَءَاهُ بِٱلْأُفُقِ ٱلْمُبِينِ
उसने तो (पराकाष्ठान के) प्रत्यक्ष क्षितिज पर होकर उस (फ़रिश्ते) को देखा है
وَمَا هُوَ عَلَى ٱلْغَيْبِ بِضَنِينٍۢ
और वह परोक्ष के मामले में कृपण नहीं है,
وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَيْطَٰنٍۢ رَّجِيمٍۢ
और वह (क़ुरआन) किसी धुतकारे हुए शैतान की लाई हुई वाणी नहीं है
فَأَيْنَ تَذْهَبُونَ
फिर तुम किधर जा रहे हो?
إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌۭ لِّلْعَٰلَمِينَ
वह तो सारे संसार के लिए बस एक अनुस्मृति है,
لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَسْتَقِيمَ
उसके लिए तो तुममे से सीधे मार्ग पर चलना चाहे
وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَٰلَمِينَ
और तुम नहीं चाह सकते सिवाय इसके कि सारे जहान का रब अल्लाह चाहे
Surah 82: Al-Infitar — الإنفطار
إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنفَطَرَتْ
जबकि आकाश फट जाएगा
وَإِذَا ٱلْكَوَاكِبُ ٱنتَثَرَتْ
और जबकि तारे बिखर जाएँगे
وَإِذَا ٱلْبِحَارُ فُجِّرَتْ
और जबकि समुद्र बह पड़ेंगे
وَإِذَا ٱلْقُبُورُ بُعْثِرَتْ
और जबकि क़बें उखेड़ दी जाएँगी
عَلِمَتْ نَفْسٌۭ مَّا قَدَّمَتْ وَأَخَّرَتْ
तब हर व्यक्ति जान लेगा जिसे उसने प्राथमिकता दी और पीछे डाला
يَٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَٰنُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ ٱلْكَرِيمِ
ऐ मनुष्य! किस चीज़ ने तुझे अपने उदार प्रभु के विषय में धोखे में डाल रखा हैं?
ٱلَّذِى خَلَقَكَ فَسَوَّىٰكَ فَعَدَلَكَ
जिसने तेरा प्रारूप बनाया, फिर नख-शिख से तुझे दुरुस्त किया और तुझे संतुलन प्रदान किया
فِىٓ أَىِّ صُورَةٍۢ مَّا شَآءَ رَكَّبَكَ
जिस रूप में चाहा उसने तुझे जोड़कर तैयार किया
كَلَّا بَلْ تُكَذِّبُونَ بِٱلدِّينِ
कुछ नहीं, बल्कि तुम बदला दिए जाने का झुठलाते हो
وَإِنَّ عَلَيْكُمْ لَحَٰفِظِينَ
जबकि तुमपर निगरानी करनेवाले नियुक्त हैं
كِرَامًۭا كَٰتِبِينَ
प्रतिष्ठित लिपिक
يَعْلَمُونَ مَا تَفْعَلُونَ
वे जान रहे होते है जो कुछ भी तुम लोग करते हो
إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ لَفِى نَعِيمٍۢ
निस्संदेह वफ़ादार लोग नेमतों में होंगे
وَإِنَّ ٱلْفُجَّارَ لَفِى جَحِيمٍۢ
और निश्चय ही दुराचारी भड़कती हुई आग में
يَصْلَوْنَهَا يَوْمَ ٱلدِّينِ
जिसमें वे बदले के दिन प्रवेश करेंगे
وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَآئِبِينَ
और उससे वे ओझल नहीं होंगे
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلدِّينِ
और तुम्हें क्या मालूम कि बदले का दिन क्या है?
ثُمَّ مَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلدِّينِ
फिर तुम्हें क्या मालूम कि बदले का दिन क्या है?
يَوْمَ لَا تَمْلِكُ نَفْسٌۭ لِّنَفْسٍۢ شَيْـًۭٔا ۖ وَٱلْأَمْرُ يَوْمَئِذٍۢ لِّلَّهِ
जिस दिन कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के लिए किसी चीज़ का अधिकारी न होगा, मामला उस दिन अल्लाह ही के हाथ में होगा
Surah 83: Al-Mutaffifin — المطففين
وَيْلٌۭ لِّلْمُطَفِّفِينَ
तबाही है घटानेवालों के लिए,
ٱلَّذِينَ إِذَا ٱكْتَالُوا۟ عَلَى ٱلنَّاسِ يَسْتَوْفُونَ
जो नापकर लोगों पर नज़र जमाए हुए लेते हैं तो पूरा-पूरा लेते हैं,
وَإِذَا كَالُوهُمْ أَو وَّزَنُوهُمْ يُخْسِرُونَ
किन्तु जब उन्हें नापकर या तौलकर देते हैं तो घटाकर देते हैं
أَلَا يَظُنُّ أُو۟لَٰٓئِكَ أَنَّهُم مَّبْعُوثُونَ
क्या वे समझते नहीं कि उन्हें (जीवित होकर) उठना है,
لِيَوْمٍ عَظِيمٍۢ
एक भारी दिन के लिए,
يَوْمَ يَقُومُ ٱلنَّاسُ لِرَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ
जिस दिन लोग सारे संसार के रब के सामने खड़े होंगे?
كَلَّآ إِنَّ كِتَٰبَ ٱلْفُجَّارِ لَفِى سِجِّينٍۢ
कुछ नहीं, निश्चय ही दुराचारियों का काग़ज 'सिज्जीन' में है
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا سِجِّينٌۭ
तुम्हें क्या मालूम कि 'सिज्जीन' क्या हैं?
كِتَٰبٌۭ مَّرْقُومٌۭ
मुहर लगा हुआ काग़ज
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
तबाही है उस दिन झुठलाने-वालों की,
ٱلَّذِينَ يُكَذِّبُونَ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ
जो बदले के दिन को झुठलाते है
وَمَا يُكَذِّبُ بِهِۦٓ إِلَّا كُلُّ مُعْتَدٍ أَثِيمٍ
और उसे तो बस प्रत्येक वह क्यक्ति ही झूठलाता है जो सीमा का उल्लंघन करनेवाला, पापी है
إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ءَايَٰتُنَا قَالَ أَسَٰطِيرُ ٱلْأَوَّلِينَ
जब हमारी आयतें उसे सुनाई जाती है तो कहता है, "ये तो पहले की कहानियाँ है।"
كَلَّا ۖ بَلْ ۜ رَانَ عَلَىٰ قُلُوبِهِم مَّا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ
कुछ नहीं, बल्कि जो कुछ वे कमाते रहे है वह उनके दिलों पर चढ़ गया है
كَلَّآ إِنَّهُمْ عَن رَّبِّهِمْ يَوْمَئِذٍۢ لَّمَحْجُوبُونَ
कुछ नहीं, अवश्य ही वे उस दिन अपने रब से ओट में होंगे,
ثُمَّ إِنَّهُمْ لَصَالُوا۟ ٱلْجَحِيمِ
फिर वे भड़कती आग में जा पड़ेगे
ثُمَّ يُقَالُ هَٰذَا ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ
फिर कहा जाएगा, "यह वही है जिस तुम झुठलाते थे"
كَلَّآ إِنَّ كِتَٰبَ ٱلْأَبْرَارِ لَفِى عِلِّيِّينَ
कुछ नही, निस्संदेह वफ़ादार लोगों का काग़ज़ 'इल्लीयीन' (उच्च श्रेणी के लोगों) में है।-
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا عِلِّيُّونَ
और तुम क्या जानो कि 'इल्लीयीन' क्या है? -
كِتَٰبٌۭ مَّرْقُومٌۭ
लिखा हुआ रजिस्टर
يَشْهَدُهُ ٱلْمُقَرَّبُونَ
जिसे देखने के लिए सामीप्य प्राप्त लोग उपस्थित होंगे,
إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ لَفِى نَعِيمٍ
निस्संदेह अच्छे लोग नेमतों में होंगे,
عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ يَنظُرُونَ
ऊँची मसनदों पर से देख रहे होंगे
تَعْرِفُ فِى وُجُوهِهِمْ نَضْرَةَ ٱلنَّعِيمِ
उनके चहरों से तुम्हें नेमतों की ताज़गी और आभा को बोध हो रहा होगा,
يُسْقَوْنَ مِن رَّحِيقٍۢ مَّخْتُومٍ
उन्हें मुहरबंद विशुद्ध पेय पिलाया जाएगा,
خِتَٰمُهُۥ مِسْكٌۭ ۚ وَفِى ذَٰلِكَ فَلْيَتَنَافَسِ ٱلْمُتَنَٰفِسُونَ
मुहर उसकी मुश्क ही होगी - जो लोग दूसरी पर बाज़ी ले जाना चाहते हो वे इस चीज़ को प्राप्त करने में बाज़ी ले जाने का प्रयास करे -
وَمِزَاجُهُۥ مِن تَسْنِيمٍ
और उसमें 'तसनीम' का मिश्रण होगा,
عَيْنًۭا يَشْرَبُ بِهَا ٱلْمُقَرَّبُونَ
हाल यह है कि वह एक स्रोत है, जिसपर बैठकर सामीप्य प्राप्त लोग पिएँगे
إِنَّ ٱلَّذِينَ أَجْرَمُوا۟ كَانُوا۟ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ يَضْحَكُونَ
जो अपराधी है वे ईमान लानेवालों पर हँसते थे,
وَإِذَا مَرُّوا۟ بِهِمْ يَتَغَامَزُونَ
और जब उनके पास से गुज़रते तो आपस में आँखों और भौंहों से इशारे करते थे,
وَإِذَا ٱنقَلَبُوٓا۟ إِلَىٰٓ أَهْلِهِمُ ٱنقَلَبُوا۟ فَكِهِينَ
और जब अपने लोगों की ओर पलटते है तो चहकते, इतराते हुए पलटते थे,
وَإِذَا رَأَوْهُمْ قَالُوٓا۟ إِنَّ هَٰٓؤُلَآءِ لَضَآلُّونَ
और जब उन्हें देखते तो कहते, "ये तो भटके हुए है।"
وَمَآ أُرْسِلُوا۟ عَلَيْهِمْ حَٰفِظِينَ
हालाँकि वे उनपर कोई निगरानी करनेवाले बनाकर नहीं भेजे गए थे
فَٱلْيَوْمَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مِنَ ٱلْكُفَّارِ يَضْحَكُونَ
तो आज ईमान लानेवाले, इनकार करनेवालों पर हँस रहे हैं,
عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ يَنظُرُونَ
ऊँची मसनदों पर से देख रहे है
هَلْ ثُوِّبَ ٱلْكُفَّارُ مَا كَانُوا۟ يَفْعَلُونَ
क्या मिल गया बदला इनकार करनेवालों को उसका जो कुछ वे करते रहे है?
Surah 84: Al-Inshiqaq — الإنشقاق
إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنشَقَّتْ
जबकि आकाश फट जाएगा,
وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ
और वह अपने रब की सुनेगा, और उसे यही चाहिए भी
وَإِذَا ٱلْأَرْضُ مُدَّتْ
जब धरती फैला दी जाएगी
وَأَلْقَتْ مَا فِيهَا وَتَخَلَّتْ
और जो कुछ उसके भीतर है उसे बाहर डालकर खाली हो जाएगी
وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ
और वह अपने रब की सुनेगी, और उसे यही चाहिए भी
يَٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَٰنُ إِنَّكَ كَادِحٌ إِلَىٰ رَبِّكَ كَدْحًۭا فَمُلَٰقِيهِ
ऐ मनुष्य! तू मशक़्क़त करता हुआ अपने रब ही की ओर खिंचा चला जा रहा है और अन्ततः उससे मिलने वाला है
فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ
फिर जिस किसी को उसका कर्म-पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया,
فَسَوْفَ يُحَاسَبُ حِسَابًۭا يَسِيرًۭا
तो उससे आसान, सरसरी हिसाब लिया जाएगा
وَيَنقَلِبُ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًۭا
और वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश पलटेगा
وَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَٰبَهُۥ وَرَآءَ ظَهْرِهِۦ
और रह वह व्यक्ति जिसका कर्म-पत्र (उसके बाएँ हाथ में) उसकी पीठ के पीछे से दिया गया,
فَسَوْفَ يَدْعُوا۟ ثُبُورًۭا
तो वह विनाश (मृत्यु) को पुकारेगा,
وَيَصْلَىٰ سَعِيرًا
और दहकती आग में जा पड़ेगा
إِنَّهُۥ كَانَ فِىٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًا
वह अपने लोगों में मग्न था,
إِنَّهُۥ ظَنَّ أَن لَّن يَحُورَ
उसने यह समझ रखा था कि उसे कभी पलटना नहीं है
بَلَىٰٓ إِنَّ رَبَّهُۥ كَانَ بِهِۦ بَصِيرًۭا
क्यों नहीं, निश्चय ही उसका रब तो उसे देख रहा था!
فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلشَّفَقِ
अतः कुछ नहीं, मैं क़सम खाता हूँ सांध्य-लालिमा की,
وَٱلَّيْلِ وَمَا وَسَقَ
और रात की और उसके समेट लेने की,
وَٱلْقَمَرِ إِذَا ٱتَّسَقَ
और चन्द्रमा की जबकि वह पूर्ण हो जाता है,
لَتَرْكَبُنَّ طَبَقًا عَن طَبَقٍۢ
निश्चय ही तुम्हें मंजिल पर मंजिल चढ़ना है
فَمَا لَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
फिर उन्हें क्या हो गया है कि ईमान नहीं लाते?
وَإِذَا قُرِئَ عَلَيْهِمُ ٱلْقُرْءَانُ لَا يَسْجُدُونَ ۩
और जब उन्हें कुरआन पढ़कर सुनाया जाता है तो सजदे में नहीं गिर पड़ते?
بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ يُكَذِّبُونَ
नहीं, बल्कि इनकार करनेवाले तो झुठलाते है,
وَٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يُوعُونَ
हालाँकि जो कुछ वे अपने अन्दर एकत्र कर रहे है, अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है
فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
अतः उन्हें दुखद यातना की मंगल सूचना दे दो
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۭ
अलबत्ता जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए कभी न समाप्त॥ होनेवाला प्रतिदान है
Surah 85: Al-Buruj — البروج
وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلْبُرُوجِ
साक्षी है बुर्जोंवाला आकाश,
وَٱلْيَوْمِ ٱلْمَوْعُودِ
और वह दिन जिसका वादा किया गया है,
وَشَاهِدٍۢ وَمَشْهُودٍۢ
और देखनेवाला, और जो देखा गया
قُتِلَ أَصْحَٰبُ ٱلْأُخْدُودِ
विनष्ट हों खाईवाले,
ٱلنَّارِ ذَاتِ ٱلْوَقُودِ
ईधन भरी आगवाले,
إِذْ هُمْ عَلَيْهَا قُعُودٌۭ
जबकि वे वहाँ बैठे होंगे
وَهُمْ عَلَىٰ مَا يَفْعَلُونَ بِٱلْمُؤْمِنِينَ شُهُودٌۭ
और वे जो कुछ ईमानवालों के साथ करते रहे, उसे देखेंगे
وَمَا نَقَمُوا۟ مِنْهُمْ إِلَّآ أَن يُؤْمِنُوا۟ بِٱللَّهِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَمِيدِ
उन्होंने उन (ईमानवालों) से केवल इस कारण बदला लिया और शत्रुता की कि वे उस अल्लाह पर ईमान रखते थे जो अत्यन्त प्रभुत्वशाली, प्रशंसनीय है,
ٱلَّذِى لَهُۥ مُلْكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ شَهِيدٌ
जिसके लिए आकाशों और धरती की बादशाही है। और अल्लाह हर चीज़ का साक्षी है
إِنَّ ٱلَّذِينَ فَتَنُوا۟ ٱلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَٰتِ ثُمَّ لَمْ يَتُوبُوا۟ فَلَهُمْ عَذَابُ جَهَنَّمَ وَلَهُمْ عَذَابُ ٱلْحَرِيقِ
जिन लोगों ने ईमानवाले पुरुषों और ईमानवाली स्त्रियों को सताया और आज़माईश में डाला, फिर तौबा न की, निश्चय ही उनके लिए जहन्नम की यातना है और उनके लिए जलने की यातना है
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَهُمْ جَنَّٰتٌۭ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْكَبِيرُ
निश्चय ही जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए बाग़ है, जिनके नीचे नहरें बह रही होगी। वही है बड़ी सफलता
إِنَّ بَطْشَ رَبِّكَ لَشَدِيدٌ
वास्तव में तुम्हारे रब की पकड़ बड़ी ही सख़्त है
إِنَّهُۥ هُوَ يُبْدِئُ وَيُعِيدُ
वही आरम्भ करता है और वही पुनरावृत्ति करता है,
وَهُوَ ٱلْغَفُورُ ٱلْوَدُودُ
वह बड़ा क्षमाशील, बहुत प्रेम करनेवाला है,
ذُو ٱلْعَرْشِ ٱلْمَجِيدُ
सिंहासन का स्वामी है, बडा गौरवशाली,
فَعَّالٌۭ لِّمَا يُرِيدُ
जो चाहे उसे कर डालनेवाला
هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ٱلْجُنُودِ
क्या तुम्हें उन सेनाओं की भी ख़बर पहुँची हैं,
فِرْعَوْنَ وَثَمُودَ
फ़िरऔन और समूद की?
بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ فِى تَكْذِيبٍۢ
नहीं, बल्कि जिन लोगों ने इनकार किया है, वे झुठलाने में लगे हुए है;
وَٱللَّهُ مِن وَرَآئِهِم مُّحِيطٌۢ
हालाँकि अल्लाह उन्हें घेरे हुए है, उनके आगे-पीछे से
بَلْ هُوَ قُرْءَانٌۭ مَّجِيدٌۭ
नहीं, बल्कि वह तो गौरव क़ुरआन है,
فِى لَوْحٍۢ مَّحْفُوظٍۭ
सुरक्षित पट्टिका में अंकित है
Surah 86: At-Tariq — الطارق
وَٱلسَّمَآءِ وَٱلطَّارِقِ
साक्षी है आकाश, और रात में प्रकट होनेवाला -
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلطَّارِقُ
और तुम क्या जानो कि रात में प्रकट होनेवाला क्या है?
ٱلنَّجْمُ ٱلثَّاقِبُ
दमकता हुआ तारा! -
إِن كُلُّ نَفْسٍۢ لَّمَّا عَلَيْهَا حَافِظٌۭ
कि हर एक व्यक्ति पर एक निगरानी करनेवाला नियुक्त है
فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَٰنُ مِمَّ خُلِقَ
अतः मनुष्य को चाहिए कि देखे कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया है
خُلِقَ مِن مَّآءٍۢ دَافِقٍۢ
एक उछलते पानी से पैदा किया गया है,
يَخْرُجُ مِنۢ بَيْنِ ٱلصُّلْبِ وَٱلتَّرَآئِبِ
जो पीठ और पसलियों के मध्य से निकलता है
إِنَّهُۥ عَلَىٰ رَجْعِهِۦ لَقَادِرٌۭ
निश्चय ही वह उसके लौटा देने की सामर्थ्य रखता है
يَوْمَ تُبْلَى ٱلسَّرَآئِرُ
जिस दिन छिपी चीज़ें परखी जाएँगी,
فَمَا لَهُۥ مِن قُوَّةٍۢ وَلَا نَاصِرٍۢ
तो उस समय उसके पास न तो अपनी कोई शक्ति होगी और न कोई सहायक
وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلرَّجْعِ
साक्षी है आवर्तन (उलट-फेर) वाला आकाश,
وَٱلْأَرْضِ ذَاتِ ٱلصَّدْعِ
और फट जानेवाली धरती
إِنَّهُۥ لَقَوْلٌۭ فَصْلٌۭ
वह दो-टूक बात है,
وَمَا هُوَ بِٱلْهَزْلِ
वह कोई हँसी-मज़ाक नही है
إِنَّهُمْ يَكِيدُونَ كَيْدًۭا
वे एक चाल चल रहे है,
وَأَكِيدُ كَيْدًۭا
और मैं भी एक चाल चल रहा हूँ
فَمَهِّلِ ٱلْكَٰفِرِينَ أَمْهِلْهُمْ رُوَيْدًۢا
अत मुहलत दे दो उन इनकार करनेवालों को; मुहलत दे दो उन्हें थोड़ी-सी
Surah 87: Al-Ala — الأعلى
سَبِّحِ ٱسْمَ رَبِّكَ ٱلْأَعْلَى
तसबीह करो, अपने सर्वाच्च रब के नाम की,
ٱلَّذِى خَلَقَ فَسَوَّىٰ
जिसने पैदा किया, फिर ठीक-ठाक किया,
وَٱلَّذِى قَدَّرَ فَهَدَىٰ
जिसने निर्धारित किया, फिर मार्ग दिखाया,
وَٱلَّذِىٓ أَخْرَجَ ٱلْمَرْعَىٰ
जिसने वनस्पति उगाई,
فَجَعَلَهُۥ غُثَآءً أَحْوَىٰ
फिर उसे ख़ूब घना और हरा-भरा कर दिया
سَنُقْرِئُكَ فَلَا تَنسَىٰٓ
हम तुम्हें पढ़ा देंगे, फिर तुम भूलोगे नहीं
إِلَّا مَا شَآءَ ٱللَّهُ ۚ إِنَّهُۥ يَعْلَمُ ٱلْجَهْرَ وَمَا يَخْفَىٰ
बात यह है कि अल्लाह की इच्छा ही क्रियान्वित है। निश्चय ही वह जानता है खुले को भी और उसे भी जो छिपा रहे
وَنُيَسِّرُكَ لِلْيُسْرَىٰ
हम तुम्हें सहज ढंग से उस चीज़ की पात्र बना देंगे जो सहज एवं मृदुल (आरामदायक) है
فَذَكِّرْ إِن نَّفَعَتِ ٱلذِّكْرَىٰ
अतः नसीहत करो, यदि नसीहत लाभप्रद हो!
سَيَذَّكَّرُ مَن يَخْشَىٰ
नसीहत हासिल कर लेगा जिसको डर होगा,
وَيَتَجَنَّبُهَا ٱلْأَشْقَى
किन्तु उससे कतराएगा वह अत्यन्त दुर्भाग्यवाला,
ٱلَّذِى يَصْلَى ٱلنَّارَ ٱلْكُبْرَىٰ
जो बड़ी आग में पड़ेगा,
ثُمَّ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحْيَىٰ
फिर वह उसमें न मरेगा न जिएगा
قَدْ أَفْلَحَ مَن تَزَكَّىٰ
सफल हो गया वह जिसने अपने आपको निखार लिया,
وَذَكَرَ ٱسْمَ رَبِّهِۦ فَصَلَّىٰ
और अपने रब के नाम का स्मरण किया, अतः नमाज़ अदा की
بَلْ تُؤْثِرُونَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا
नहीं, बल्कि तुम तो सांसारिक जीवन को प्राथमिकता देते हो,
وَٱلْءَاخِرَةُ خَيْرٌۭ وَأَبْقَىٰٓ
हालाँकि आख़िरत अधिक उत्तम और शेष रहनेवाली है
إِنَّ هَٰذَا لَفِى ٱلصُّحُفِ ٱلْأُولَىٰ
निस्संदेह यही बात पहले की किताबों में भी है;
صُحُفِ إِبْرَٰهِيمَ وَمُوسَىٰ
इबराईम और मूसा की किताबों में
Surah 88: Al-Ghashiyah — الغاشية
هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ٱلْغَٰشِيَةِ
क्या तुम्हें उस छा जानेवाली की ख़बर पहुँची है?
وُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍ خَٰشِعَةٌ
उस दिन कितने ही चेहरे गिरे हुए होंगे,
عَامِلَةٌۭ نَّاصِبَةٌۭ
कठिन परिश्रम में पड़े, थके-हारे
تَصْلَىٰ نَارًا حَامِيَةًۭ
दहकती आग में प्रवेश करेंगे
تُسْقَىٰ مِنْ عَيْنٍ ءَانِيَةٍۢ
खौलते हुए स्रोत से पिएँगे,
لَّيْسَ لَهُمْ طَعَامٌ إِلَّا مِن ضَرِيعٍۢ
उनके लिए कोई खाना न होगा सिवाय एक प्रकार के ज़री के,
لَّا يُسْمِنُ وَلَا يُغْنِى مِن جُوعٍۢ
जो न पुष्ट करे और न भूख मिटाए
وُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍۢ نَّاعِمَةٌۭ
उस दिन कितने ही चेहरे प्रफुल्लित और सौम्य होंगे,
لِّسَعْيِهَا رَاضِيَةٌۭ
अपने प्रयास पर प्रसन्न,
فِى جَنَّةٍ عَالِيَةٍۢ
उच्च जन्नत में,
لَّا تَسْمَعُ فِيهَا لَٰغِيَةًۭ
जिसमें कोई व्यर्थ बात न सुनेंगे
فِيهَا عَيْنٌۭ جَارِيَةٌۭ
उसमें स्रोत प्रवाहित होगा,
فِيهَا سُرُرٌۭ مَّرْفُوعَةٌۭ
उसमें ऊँची-ऊँची मसनदें होगी,
وَأَكْوَابٌۭ مَّوْضُوعَةٌۭ
प्याले ढंग से रखे होंगे,
وَنَمَارِقُ مَصْفُوفَةٌۭ
क्रम से गाव तकिए लगे होंगे,
وَزَرَابِىُّ مَبْثُوثَةٌ
और हर ओर क़ालीने बिछी होंगी
أَفَلَا يَنظُرُونَ إِلَى ٱلْإِبِلِ كَيْفَ خُلِقَتْ
फिर क्या वे ऊँट की ओर नहीं देखते कि कैसा बनाया गया?
وَإِلَى ٱلسَّمَآءِ كَيْفَ رُفِعَتْ
और आकाश की ओर कि कैसा ऊँचा किया गया?
وَإِلَى ٱلْجِبَالِ كَيْفَ نُصِبَتْ
और पहाड़ो की ओर कि कैसे खड़े किए गए?
وَإِلَى ٱلْأَرْضِ كَيْفَ سُطِحَتْ
और धरती की ओर कि कैसी बिछाई गई?
فَذَكِّرْ إِنَّمَآ أَنتَ مُذَكِّرٌۭ
अच्छा तो नसीहत करो! तुम तो बस एक नसीहत करनेवाले हो
لَّسْتَ عَلَيْهِم بِمُصَيْطِرٍ
तुम उनपर कोई दरोग़ा नही हो
إِلَّا مَن تَوَلَّىٰ وَكَفَرَ
किन्तु जिस किसी ने मुँह फेरा और इनकार किया,
فَيُعَذِّبُهُ ٱللَّهُ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَكْبَرَ
तो अल्लाह उसे बड़ी यातना देगा
إِنَّ إِلَيْنَآ إِيَابَهُمْ
निस्संदेह हमारी ओर ही है उनका लौटना,
ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا حِسَابَهُم
फिर हमारे ही ज़िम्मे है उनका हिसाब लेना
Surah 89: Al-Fajr — الفجر
وَٱلْفَجْرِ
साक्षी है उषाकाल,
وَلَيَالٍ عَشْرٍۢ
साक्षी है दस रातें,
وَٱلشَّفْعِ وَٱلْوَتْرِ
साक्षी है युग्म और अयुग्म,
وَٱلَّيْلِ إِذَا يَسْرِ
साक्षी है रात जब वह विदा हो रही हो
هَلْ فِى ذَٰلِكَ قَسَمٌۭ لِّذِى حِجْرٍ
क्या इसमें बुद्धिमान के लिए बड़ी गवाही है?
أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعَادٍ
क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे रब ने क्या किया आद के साथ,
إِرَمَ ذَاتِ ٱلْعِمَادِ
स्तम्भों वाले 'इरम' के साथ?
ٱلَّتِى لَمْ يُخْلَقْ مِثْلُهَا فِى ٱلْبِلَٰدِ
वे ऐसे थे जिनके सदृश बस्तियों में पैदा नहीं हुए
وَثَمُودَ ٱلَّذِينَ جَابُوا۟ ٱلصَّخْرَ بِٱلْوَادِ
और समूद के साथ, जिन्होंने घाटी में चट्टाने तराशी थी,
وَفِرْعَوْنَ ذِى ٱلْأَوْتَادِ
और मेखोवाले फ़िरऔन के साथ?
ٱلَّذِينَ طَغَوْا۟ فِى ٱلْبِلَٰدِ
वे लोग कि जिन्होंने देशो में सरकशी की,
فَأَكْثَرُوا۟ فِيهَا ٱلْفَسَادَ
और उनमें बहुत बिगाड़ पैदा किया
فَصَبَّ عَلَيْهِمْ رَبُّكَ سَوْطَ عَذَابٍ
अततः तुम्हारे रब ने उनपर यातना का कोड़ा बरसा दिया
إِنَّ رَبَّكَ لَبِٱلْمِرْصَادِ
निस्संदेह तुम्हारा रब घात में रहता है
فَأَمَّا ٱلْإِنسَٰنُ إِذَا مَا ٱبْتَلَىٰهُ رَبُّهُۥ فَأَكْرَمَهُۥ وَنَعَّمَهُۥ فَيَقُولُ رَبِّىٓ أَكْرَمَنِ
किन्तु मनुष्य का हाल यह है कि जब उसका रब इस प्रकार उसकी परीक्षा करता है कि उसे प्रतिष्ठा और नेमत प्रदान करता है, तो वह कहता है, "मेरे रब ने मुझे प्रतिष्ठित किया।"
وَأَمَّآ إِذَا مَا ٱبْتَلَىٰهُ فَقَدَرَ عَلَيْهِ رِزْقَهُۥ فَيَقُولُ رَبِّىٓ أَهَٰنَنِ
किन्तु जब कभी वह उसकी परीक्षा इस प्रकार करता है कि उसकी रोज़ी नपी-तुली कर देता है, तो वह कहता है, "मेरे रब ने मेरा अपमान किया।"
كَلَّا ۖ بَل لَّا تُكْرِمُونَ ٱلْيَتِيمَ
कदापि नहीं, बल्कि तुम अनाथ का सम्मान नहीं करते,
وَلَا تَحَٰٓضُّونَ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ
और न मुहताज को खिलान पर एक-दूसरे को उभारते हो,
وَتَأْكُلُونَ ٱلتُّرَاثَ أَكْلًۭا لَّمًّۭا
और सारी मीरास समेटकर खा जाते हो,
وَتُحِبُّونَ ٱلْمَالَ حُبًّۭا جَمًّۭا
और धन से उत्कट प्रेम रखते हो
كَلَّآ إِذَا دُكَّتِ ٱلْأَرْضُ دَكًّۭا دَكًّۭا
कुछ नहीं, जब धरती कूट-कूटकर चुर्ण-विचुर्ण कर दी जाएगी,
وَجَآءَ رَبُّكَ وَٱلْمَلَكُ صَفًّۭا صَفًّۭا
और तुम्हारा रब और फ़रिश्ता (बन्दों की) एक-एक पंक्ति के पास आएगा,
وَجِا۟ىٓءَ يَوْمَئِذٍۭ بِجَهَنَّمَ ۚ يَوْمَئِذٍۢ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَٰنُ وَأَنَّىٰ لَهُ ٱلذِّكْرَىٰ
और जहन्नम को उस दिन लाया जाएगा, उस दिन मनुष्य चेतेगा, किन्तु कहाँ है उसके लिए लाभप्रद उस समय का चेतना?
يَقُولُ يَٰلَيْتَنِى قَدَّمْتُ لِحَيَاتِى
वह कहेगा, "ऐ काश! मैंने अपने जीवन के लिए कुछ करके आगे भेजा होता।"
فَيَوْمَئِذٍۢ لَّا يُعَذِّبُ عَذَابَهُۥٓ أَحَدٌۭ
फिर उस दिन कोई नहीं जो उसकी जैसी यातना दे,
وَلَا يُوثِقُ وَثَاقَهُۥٓ أَحَدٌۭ
और कोई नहीं जो उसकी जकड़बन्द की तरह बाँधे
يَٰٓأَيَّتُهَا ٱلنَّفْسُ ٱلْمُطْمَئِنَّةُ
"ऐ संतुष्ट आत्मा!
ٱرْجِعِىٓ إِلَىٰ رَبِّكِ رَاضِيَةًۭ مَّرْضِيَّةًۭ
लौट अपने रब की ओर, इस तरह कि तू उससे राज़ी है वह तुझसे राज़ी है। अतः मेरे बन्दों में सम्मिलित हो जा। -
فَٱدْخُلِى فِى عِبَٰدِى
अतः मेरे बन्दों में सम्मिलित हो जा
وَٱدْخُلِى جَنَّتِى
और प्रवेश कर मेरी जन्नत में।"
Surah 90: Al-Balad — البلد
لَآ أُقْسِمُ بِهَٰذَا ٱلْبَلَدِ
सुनो! मैं क़सम खाता हूँ इस नगर (मक्का) की -
وَأَنتَ حِلٌّۢ بِهَٰذَا ٱلْبَلَدِ
हाल यह है कि तुम इसी नगर में रह रहे हो -
وَوَالِدٍۢ وَمَا وَلَدَ
और बाप और उसकी सन्तान की,
لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَٰنَ فِى كَبَدٍ
निस्संदेह हमने मनुष्य को पूर्ण मशक़्क़त (अनुकूलता और सन्तुलन) के साथ पैदा किया
أَيَحْسَبُ أَن لَّن يَقْدِرَ عَلَيْهِ أَحَدٌۭ
क्या वह समझता है कि उसपर किसी का बस न चलेगा?
يَقُولُ أَهْلَكْتُ مَالًۭا لُّبَدًا
कहता है कि "मैंने ढेरो माल उड़ा दिया।"
أَيَحْسَبُ أَن لَّمْ يَرَهُۥٓ أَحَدٌ
क्या वह समझता है कि किसी ने उसे देखा नहीं?
أَلَمْ نَجْعَل لَّهُۥ عَيْنَيْنِ
क्या हमने उसे नहीं दी दो आँखें,
وَلِسَانًۭا وَشَفَتَيْنِ
और एक ज़बान और दो होंठ?
وَهَدَيْنَٰهُ ٱلنَّجْدَيْنِ
और क्या ऐसा नहीं है कि हमने दिखाई उसे दो ऊँचाइयाँ?
فَلَا ٱقْتَحَمَ ٱلْعَقَبَةَ
किन्तु वह तो हुमककर घाटी में से गुजंरा ही नहीं और (न उसने मुक्ति का मार्ग पाया)
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْعَقَبَةُ
और तुम्हें क्या मालूम कि वह घाटी क्या है!
فَكُّ رَقَبَةٍ
किसी गरदन का छुड़ाना
أَوْ إِطْعَٰمٌۭ فِى يَوْمٍۢ ذِى مَسْغَبَةٍۢ
या भूख के दिन खाना खिलाना
يَتِيمًۭا ذَا مَقْرَبَةٍ
किसी निकटवर्ती अनाथ को,
أَوْ مِسْكِينًۭا ذَا مَتْرَبَةٍۢ
या धूल-धूसरित मुहताज को;
ثُمَّ كَانَ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْمَرْحَمَةِ
फिर यह कि वह उन लोगों में से हो जो ईमान लाए और जिन्होंने एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की , और एक-दूसरे को दया की ताकीद की
أُو۟لَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ
वही लोग है सौभाग्यशाली
وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَا هُمْ أَصْحَٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ
रहे वे लोग जिन्होंने हमारी आयातों का इनकार किया, वे दुर्भाग्यशाली लोग है
عَلَيْهِمْ نَارٌۭ مُّؤْصَدَةٌۢ
उनपर आग होगी, जिसे बन्द कर दिया गया होगा
Surah 91: Ash-Shams — الشمس
وَٱلشَّمْسِ وَضُحَىٰهَا
साक्षी है सूर्य और उसकी प्रभा,
وَٱلْقَمَرِ إِذَا تَلَىٰهَا
और चन्द्रमा जबकि वह उनके पीछे आए,
وَٱلنَّهَارِ إِذَا جَلَّىٰهَا
और दिन, जबकि वह उसे प्रकट कर दे,
وَٱلَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰهَا
और रात, जबकि वह उसको ढाँक ले
وَٱلسَّمَآءِ وَمَا بَنَىٰهَا
और आकाश और जैसा कुछ उसे उठाया,
وَٱلْأَرْضِ وَمَا طَحَىٰهَا
और धरती और जैसा कुछ उसे बिछाया
وَنَفْسٍۢ وَمَا سَوَّىٰهَا
और आत्मा और जैसा कुछ उसे सँवारा
فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَىٰهَا
फिर उसके दिल में डाली उसकी बुराई और उसकी परहेज़गारी
قَدْ أَفْلَحَ مَن زَكَّىٰهَا
सफल हो गया जिसने उसे विकसित किया
وَقَدْ خَابَ مَن دَسَّىٰهَا
और असफल हुआ जिसने उसे दबा दिया
كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِطَغْوَىٰهَآ
समूद ने अपनी सरकशी से झुठलाया,
إِذِ ٱنۢبَعَثَ أَشْقَىٰهَا
जब उनमें का सबसे बड़ा दुर्भाग्यशाली उठ खड़ा हुआ,
فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ ٱللَّهِ نَاقَةَ ٱللَّهِ وَسُقْيَٰهَا
तो अल्लाह के रसूल ने उनसे कहा, "सावधान, अल्लाह की ऊँटनी और उसके पिलाने (की बारी) से।"
فَكَذَّبُوهُ فَعَقَرُوهَا فَدَمْدَمَ عَلَيْهِمْ رَبُّهُم بِذَنۢبِهِمْ فَسَوَّىٰهَا
किन्तु उन्होंने उसे झुठलाया और उस ऊँटनी की कूचें काट डाली। अन्ततः उनके रब ने उनके गुनाह के कारण उनपर तबाही डाल दी और उन्हें बराबर कर दिया
وَلَا يَخَافُ عُقْبَٰهَا
और उसे उसके परिणाम का कोई भय नहीं
Surah 92: Al-Lail — الليل
وَٱلَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰ
साक्षी है रात जबकि वह छा जाए,
وَٱلنَّهَارِ إِذَا تَجَلَّىٰ
और दिन जबकि वह प्रकाशमान हो,
وَمَا خَلَقَ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰٓ
और नर और मादा का पैदा करना,
إِنَّ سَعْيَكُمْ لَشَتَّىٰ
कि तुम्हारा प्रयास भिन्न-भिन्न है
فَأَمَّا مَنْ أَعْطَىٰ وَٱتَّقَىٰ
तो जिस किसी ने दिया और डर रखा,
وَصَدَّقَ بِٱلْحُسْنَىٰ
और अच्छी चीज़ की पुष्टि की,
فَسَنُيَسِّرُهُۥ لِلْيُسْرَىٰ
हम उस सहज ढंग से उस चीज का पात्र बना देंगे, जो सहज और मृदुल (सुख-साध्य) है
وَأَمَّا مَنۢ بَخِلَ وَٱسْتَغْنَىٰ
रहा वह व्यक्ति जिसने कंजूसी की और बेपरवाही बरती,
وَكَذَّبَ بِٱلْحُسْنَىٰ
और अच्छी चीज़ को झुठला दिया,
فَسَنُيَسِّرُهُۥ لِلْعُسْرَىٰ
हम उसे सहज ढंग से उस चीज़ का पात्र बना देंगे, जो कठिन चीज़ (कष्ट-साध्य) है
وَمَا يُغْنِى عَنْهُ مَالُهُۥٓ إِذَا تَرَدَّىٰٓ
और उसका माल उसके कुछ काम न आएगा, जब वह (सिर के बल) खड्ड में गिरेगा
إِنَّ عَلَيْنَا لَلْهُدَىٰ
निस्संदेह हमारे ज़िम्मे है मार्ग दिखाना
وَإِنَّ لَنَا لَلْءَاخِرَةَ وَٱلْأُولَىٰ
और वास्तव में हमारे अधिकार में है आख़िरत और दुनिया भी
فَأَنذَرْتُكُمْ نَارًۭا تَلَظَّىٰ
अतः मैंने तुम्हें दहकती आग से सावधान कर दिया
لَا يَصْلَىٰهَآ إِلَّا ٱلْأَشْقَى
इसमें बस वही पड़ेगा जो बड़ा ही अभागा होगा,
ٱلَّذِى كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ
जिसने झुठलाया और मुँह फेरा
وَسَيُجَنَّبُهَا ٱلْأَتْقَى
और उससे बच जाएगा वह अत्यन्त परहेज़गार व्यक्ति,
ٱلَّذِى يُؤْتِى مَالَهُۥ يَتَزَكَّىٰ
जो अपना माल देकर अपने आपको निखारता है
وَمَا لِأَحَدٍ عِندَهُۥ مِن نِّعْمَةٍۢ تُجْزَىٰٓ
और हाल यह है कि किसी का उसपर उपकार नहीं कि उसका बदला दिया जा रहा हो,
إِلَّا ٱبْتِغَآءَ وَجْهِ رَبِّهِ ٱلْأَعْلَىٰ
बल्कि इससे अभीष्ट केवल उसके अपने उच्च रब के मुख (प्रसन्नता) की चाह है
وَلَسَوْفَ يَرْضَىٰ
और वह शीघ्र ही राज़ी हो जाएगा
Surah 93: Ad-Duha — الضحى
وَٱلضُّحَىٰ
साक्षी है चढ़ता दिन,
وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ
और रात जबकि उसका सन्नाटा छा जाए
مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ
तुम्हारे रब ने तुम्हें न तो विदा किया और न वह बेज़ार (अप्रसन्न) हुआ
وَلَلْءَاخِرَةُ خَيْرٌۭ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ
और निश्चय ही बाद में आनेवाली (अवधि) तुम्हारे लिए पहलेवाली से उत्तम है
وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ
और शीघ्र ही तुम्हारा रब तुम्हें प्रदान करेगा कि तुम प्रसन्न हो जाओगे
أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًۭا فَـَٔاوَىٰ
क्या ऐसा नहीं कि उसने तुम्हें अनाथ पाया तो ठिकाना दिया?
وَوَجَدَكَ ضَآلًّۭا فَهَدَىٰ
और तुम्हें मार्ग से अपरिचित पाया तो मार्ग दिखाया?
وَوَجَدَكَ عَآئِلًۭا فَأَغْنَىٰ
और तुम्हें निर्धन पाया तो समृद्ध कर दिया?
فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ
अतः जो अनाथ हो उसे मत दबाना,
وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ
और जो माँगता हो उसे न झिझकना,
وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ
और जो तुम्हें रब की अनुकम्पा है, उसे बयान करते रहो
Surah 94: Ash-Sharh — الشرح
أَلَمْ نَشْرَحْ لَكَ صَدْرَكَ
क्या ऐसा नहीं कि हमने तुम्हारा सीना तुम्हारे लिए खोल दिया?
وَوَضَعْنَا عَنكَ وِزْرَكَ
और तुमपर से तुम्हारा बोझ उतार दिया,
ٱلَّذِىٓ أَنقَضَ ظَهْرَكَ
जो तुम्हारी कमर तोड़े डाल रहा था?
وَرَفَعْنَا لَكَ ذِكْرَكَ
और तुम्हारे लिए तुम्हारे ज़िक्र को ऊँचा कर दिया?
فَإِنَّ مَعَ ٱلْعُسْرِ يُسْرًا
अतः निस्संदेह कठिनाई के साथ आसानी भी है
إِنَّ مَعَ ٱلْعُسْرِ يُسْرًۭا
निस्संदेह कठिनाई के साथ आसानी भी है
فَإِذَا فَرَغْتَ فَٱنصَبْ
अतः जब निवृत हो तो परिश्रम में लग जाओ,
وَإِلَىٰ رَبِّكَ فَٱرْغَب
और अपने रब से लौ लगाओ
Surah 95: At-Tin — التين
وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيْتُونِ
साक्षी है तीन और ज़ैतून
وَطُورِ سِينِينَ
और तूर सीनीन,
وَهَٰذَا ٱلْبَلَدِ ٱلْأَمِينِ
और यह शान्तिपूर्ण भूमि (मक्का)
لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَٰنَ فِىٓ أَحْسَنِ تَقْوِيمٍۢ
निस्संदेह हमने मनुष्य को सर्वोत्तम संरचना के साथ पैदा किया
ثُمَّ رَدَدْنَٰهُ أَسْفَلَ سَٰفِلِينَ
फिर हमने उसे निकृष्टतम दशा की ओर लौटा दिया, जबकि वह स्वयं गिरनेवाला बना
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ فَلَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۢ
सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और जिन्होंने अच्छे कर्म किए, तो उनके लिए कभी न समाप्त होनेवाला बदला है
فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعْدُ بِٱلدِّينِ
अब इसके बाद क्या है, जो बदले के विषय में तुम्हें झुठलाए?
أَلَيْسَ ٱللَّهُ بِأَحْكَمِ ٱلْحَٰكِمِينَ
क्या अल्लाह सब हाकिमों से बड़ा हाकिम नहीं हैं?
Surah 96: Al-Alaq — العلق
ٱقْرَأْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلَّذِى خَلَقَ
पढ़ो, अपने रब के नाम के साथ जिसने पैदा किया,
خَلَقَ ٱلْإِنسَٰنَ مِنْ عَلَقٍ
पैदा किया मनुष्य को जमे हुए ख़ून के एक लोथड़े से
ٱقْرَأْ وَرَبُّكَ ٱلْأَكْرَمُ
पढ़ो, हाल यह है कि तुम्हारा रब बड़ा ही उदार है,
ٱلَّذِى عَلَّمَ بِٱلْقَلَمِ
जिसने क़लम के द्वारा शिक्षा दी,
عَلَّمَ ٱلْإِنسَٰنَ مَا لَمْ يَعْلَمْ
मनुष्य को वह ज्ञान प्रदान किया जिस वह न जानता था
كَلَّآ إِنَّ ٱلْإِنسَٰنَ لَيَطْغَىٰٓ
कदापि नहीं, मनुष्य सरकशी करता है,
أَن رَّءَاهُ ٱسْتَغْنَىٰٓ
इसलिए कि वह अपने आपको आत्मनिर्भर देखता है
إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلرُّجْعَىٰٓ
निश्चय ही तुम्हारे रब ही की ओर पलटना है
أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يَنْهَىٰ
क्या तुमने देखा उस व्यक्ति को
عَبْدًا إِذَا صَلَّىٰٓ
जो एक बन्दे को रोकता है, जब वह नमाज़ अदा करता है? -
أَرَءَيْتَ إِن كَانَ عَلَى ٱلْهُدَىٰٓ
तुम्हारा क्या विचार है? यदि वह सीधे मार्ग पर हो,
أَوْ أَمَرَ بِٱلتَّقْوَىٰٓ
या परहेज़गारी का हुक्म दे (उसके अच्छा होने में क्या संदेह है)
أَرَءَيْتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰٓ
तुम्हारा क्या विचार है? यदि उस (रोकनेवाले) ने झुठलाया और मुँह मोड़ा (तो उसके बुरा होने में क्या संदेह है) -
أَلَمْ يَعْلَم بِأَنَّ ٱللَّهَ يَرَىٰ
क्या उसने नहीं जाना कि अल्लाह देख रहा है?
كَلَّا لَئِن لَّمْ يَنتَهِ لَنَسْفَعًۢا بِٱلنَّاصِيَةِ
कदापि नहीं, यदि वह बाज़ न आया तो हम चोटी पकड़कर घसीटेंगे,
نَاصِيَةٍۢ كَٰذِبَةٍ خَاطِئَةٍۢ
झूठी, ख़ताकार चोटी
فَلْيَدْعُ نَادِيَهُۥ
अब बुला ले वह अपनी मजलिस को!
سَنَدْعُ ٱلزَّبَانِيَةَ
हम भी बुलाए लेते है सिपाहियों को
كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَٱسْجُدْ وَٱقْتَرِب ۩
कदापि नहीं, उसकी बात न मानो और सजदे करते और क़रीब होते रहो
Surah 97: Al-Qadr — القدر
إِنَّآ أَنزَلْنَٰهُ فِى لَيْلَةِ ٱلْقَدْرِ
हमने इसे क़द्र की रात में अवतरित किया
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ
और तुम्हें क्या मालूम कि क़द्र की रात क्या है?
لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ خَيْرٌۭ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍۢ
क़द्र की रात उत्तम है हज़ार महीनों से,
تَنَزَّلُ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍۢ
उसमें फ़रिश्तें और रूह हर महत्वपूर्ण मामलें में अपने रब की अनुमति से उतरते है
سَلَٰمٌ هِىَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ ٱلْفَجْرِ
वह रात पूर्णतः शान्ति और सलामती है, उषाकाल के उदय होने तक
Surah 98: Al-Bayinah — البينة
لَمْ يَكُنِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِنْ أَهْلِ ٱلْكِتَٰبِ وَٱلْمُشْرِكِينَ مُنفَكِّينَ حَتَّىٰ تَأْتِيَهُمُ ٱلْبَيِّنَةُ
किताबवालों और मुशरिकों (बहुदेववादियों) में से जिन लोगों ने इनकार किया वे कुफ़्र (इनकार) से अलग होनेवाले नहीं जब तक कि उनके पास स्पष्ट प्रमाण न आ जाए;
رَسُولٌۭ مِّنَ ٱللَّهِ يَتْلُوا۟ صُحُفًۭا مُّطَهَّرَةًۭ
अल्लाह की ओर से एक रसूल पवित्र पृष्ठों को पढ़ता हुआ;
فِيهَا كُتُبٌۭ قَيِّمَةٌۭ
जिनमें ठोस और ठीक आदेश अंकित हों,
وَمَا تَفَرَّقَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَٰبَ إِلَّا مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْهُمُ ٱلْبَيِّنَةُ
हालाँकि जिन्हें किताब दी गई थी। वे इसके पश्चात फूट में पड़े कि उनके पास स्पष्ट प्रमाण आ चुका था
وَمَآ أُمِرُوٓا۟ إِلَّا لِيَعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَ حُنَفَآءَ وَيُقِيمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤْتُوا۟ ٱلزَّكَوٰةَ ۚ وَذَٰلِكَ دِينُ ٱلْقَيِّمَةِ
और उन्हें आदेश भी बस यही दिया गया था कि वे अल्लाह की बन्दगी करे निष्ठा एवं विनयशीलता को उसके लिए विशिष्ट करके, बिलकुल एकाग्र होकर, और नमाज़ की पाबन्दी करें और ज़कात दे। और यही है सत्यवादी समुदाय का धर्म
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِنْ أَهْلِ ٱلْكِتَٰبِ وَٱلْمُشْرِكِينَ فِى نَارِ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَآ ۚ أُو۟لَٰٓئِكَ هُمْ شَرُّ ٱلْبَرِيَّةِ
निस्संदेह किताबवालों और मुशरिकों (बहुदेववादियों) में से जिन लोगों ने इनकार किया है, वे जहन्नम की आग में पड़ेगे; उसमें सदैव रहने के लिए। वही पैदा किए गए प्राणियों में सबसे बुरे है
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ أُو۟لَٰٓئِكَ هُمْ خَيْرُ ٱلْبَرِيَّةِ
किन्तु निश्चय ही वे लोग, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए पैदा किए गए प्राणियों में सबसे अच्छे है
جَزَآؤُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّٰتُ عَدْنٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًۭا ۖ رَّضِىَ ٱللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا۟ عَنْهُ ۚ ذَٰلِكَ لِمَنْ خَشِىَ رَبَّهُۥ
उनका बदला उनके अपने रब के पास सदाबहार बाग़ है, जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी। उनमें वे सदैव रहेंगे। अल्लाह उनसे राज़ी हुआ और वे उससे राज़ी हुए। यह कुछ उसके लिए है, जो अपने रब से डरा
Surah 99: Az-Zalzalah — الزلزلة
إِذَا زُلْزِلَتِ ٱلْأَرْضُ زِلْزَالَهَا
जब धरती इस प्रकार हिला डाली जाएगी जैसा उसे हिलाया जाना है,
وَأَخْرَجَتِ ٱلْأَرْضُ أَثْقَالَهَا
और धरती अपने बोझ बाहर निकाल देगी,
وَقَالَ ٱلْإِنسَٰنُ مَا لَهَا
और मनुष्य कहेगा, "उसे क्या हो गया है?"
يَوْمَئِذٍۢ تُحَدِّثُ أَخْبَارَهَا
उस दिन वह अपना वृत्तांत सुनाएगी,
بِأَنَّ رَبَّكَ أَوْحَىٰ لَهَا
इस कारण कि तुम्हारे रब ने उसे यही संकेत किया होगा
يَوْمَئِذٍۢ يَصْدُرُ ٱلنَّاسُ أَشْتَاتًۭا لِّيُرَوْا۟ أَعْمَٰلَهُمْ
उस दिन लोग अलग-अलग निकलेंगे, ताकि उन्हें कर्म दिखाए जाएँ
فَمَن يَعْمَلْ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ خَيْرًۭا يَرَهُۥ
अतः जो कोई कणभर भी नेकी करेगा, वह उसे देख लेगा,
وَمَن يَعْمَلْ مِثْقَالَ ذَرَّةٍۢ شَرًّۭا يَرَهُۥ
और जो कोई कणभर भी बुराई करेगा, वह भी उसे देख लेगा
Surah 100: Al-Adiyat — العاديات
وَٱلْعَٰدِيَٰتِ ضَبْحًۭا
साक्षी है जो हाँफते-फुँकार मारते हुए दौड़ते है,
فَٱلْمُورِيَٰتِ قَدْحًۭا
फिर ठोकरों से चिनगारियाँ निकालते है,
فَٱلْمُغِيرَٰتِ صُبْحًۭا
फिर सुबह सवेरे धावा मारते होते है,
فَأَثَرْنَ بِهِۦ نَقْعًۭا
उसमें उठाया उन्होंने गर्द-गुबार
فَوَسَطْنَ بِهِۦ جَمْعًا
और इसी हाल में वे दल में जा घुसे
إِنَّ ٱلْإِنسَٰنَ لِرَبِّهِۦ لَكَنُودٌۭ
निस्संदेह मनुष्य अपने रब का बड़ा अकृतज्ञ हैं,
وَإِنَّهُۥ عَلَىٰ ذَٰلِكَ لَشَهِيدٌۭ
और निश्चय ही वह स्वयं इसपर गवाह है!
وَإِنَّهُۥ لِحُبِّ ٱلْخَيْرِ لَشَدِيدٌ
और निश्चय ही वह धन के मोह में बड़ा दृढ़ है
۞ أَفَلَا يَعْلَمُ إِذَا بُعْثِرَ مَا فِى ٱلْقُبُورِ
तो क्या वह जानता नहीं जब उगवला लिया जाएगा तो क़ब्रों में है
وَحُصِّلَ مَا فِى ٱلصُّدُورِ
और स्पष्ट अनावृत्त कर दिया जाएगा तो कुछ सीनों में है
إِنَّ رَبَّهُم بِهِمْ يَوْمَئِذٍۢ لَّخَبِيرٌۢ
निस्संदेह उनका रब उस दिन उनकी पूरी ख़बर रखता होगा
Surah 101: Al-Qariah — القارعة
ٱلْقَارِعَةُ
वह खड़खड़ानेवाली!
مَا ٱلْقَارِعَةُ
क्या है वह खड़खड़ानेवाली?
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْقَارِعَةُ
और तुम्हें क्या मालूम कि क्या है वह खड़खड़ानेवाली?
يَوْمَ يَكُونُ ٱلنَّاسُ كَٱلْفَرَاشِ ٱلْمَبْثُوثِ
जिस दिन लोग बिखरे हुए पतंगों के सदृश हो जाएँगें,
وَتَكُونُ ٱلْجِبَالُ كَٱلْعِهْنِ ٱلْمَنفُوشِ
और पहाड़ के धुन के हुए रंग-बिरंग के ऊन जैसे हो जाएँगे
فَأَمَّا مَن ثَقُلَتْ مَوَٰزِينُهُۥ
फिर जिस किसी के वज़न भारी होंगे,
فَهُوَ فِى عِيشَةٍۢ رَّاضِيَةٍۢ
वह मनभाते जीवन में रहेगा
وَأَمَّا مَنْ خَفَّتْ مَوَٰزِينُهُۥ
और रहा वह व्यक्ति जिसके वज़न हलके होंगे,
فَأُمُّهُۥ هَاوِيَةٌۭ
उसकी माँ होगी गहरा खड्ड
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا هِيَهْ
और तुम्हें क्या मालूम कि वह क्या है?
نَارٌ حَامِيَةٌۢ
आग है दहकती हुई
Surah 102: Al-Takathur — التكاثر
أَلْهَىٰكُمُ ٱلتَّكَاثُرُ
तुम्हें एक-दूसरे के मुक़ाबले में बहुतायत के प्रदर्शन और घमंड ने ग़फ़़लत में डाल रखा है,
حَتَّىٰ زُرْتُمُ ٱلْمَقَابِرَ
यहाँ तक कि तुम क़ब्रिस्तानों में पहुँच गए
كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُونَ
कुछ नहीं, तुम शीघ्र ही जान लोगे
ثُمَّ كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُونَ
फिर, कुछ नहीं, तुम्हें शीघ्र ही मालूम हो जाएगा -
كَلَّا لَوْ تَعْلَمُونَ عِلْمَ ٱلْيَقِينِ
कुछ नहीं, अगर तुम विश्वसनीय ज्ञान के रूप में जान लो! (तो तुम धन-दौलत के पुजारी न बनो) -
لَتَرَوُنَّ ٱلْجَحِيمَ
अवश्य ही तुम भड़कती आग से दो-चार होगे
ثُمَّ لَتَرَوُنَّهَا عَيْنَ ٱلْيَقِينِ
फिर सुनो, उसे अवश्य देखोगे इस दशा में कि वह यथावत विश्वास होगा
ثُمَّ لَتُسْـَٔلُنَّ يَوْمَئِذٍ عَنِ ٱلنَّعِيمِ
फिर निश्चय ही उस दिन तुमसे नेमतों के बारे में पूछा जाएगा
Surah 103: Al-Asr — العصر
وَٱلْعَصْرِ
गवाह है गुज़रता समय,
إِنَّ ٱلْإِنسَٰنَ لَفِى خُسْرٍ
कि वास्तव में मनुष्य घाटे में है,
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْحَقِّ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ
सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और अच्छे कर्म किए और एक-दूसरे को हक़ की ताकीद की, और एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की
Surah 104: Al-Humazah — الهمزة
وَيْلٌۭ لِّكُلِّ هُمَزَةٍۢ لُّمَزَةٍ
तबाही है हर कचो के लगानेवाले, ऐब निकालनेवाले के लिए,
ٱلَّذِى جَمَعَ مَالًۭا وَعَدَّدَهُۥ
जो माल इकट्ठा करता और उसे गिनता रहा
يَحْسَبُ أَنَّ مَالَهُۥٓ أَخْلَدَهُۥ
समझता है कि उसके माल ने उसे अमर कर दिया
كَلَّا ۖ لَيُنۢبَذَنَّ فِى ٱلْحُطَمَةِ
कदापि नहीं, वह चूर-चूर कर देनेवाली में फेंक दिया जाएगा,
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْحُطَمَةُ
और तुम्हें क्या मालूम कि वह चूर-चूर कर देनेवाली क्या है?
نَارُ ٱللَّهِ ٱلْمُوقَدَةُ
वह अल्लाह की दहकाई हुई आग है,
ٱلَّتِى تَطَّلِعُ عَلَى ٱلْأَفْـِٔدَةِ
जो झाँक लेती है दिलों को
إِنَّهَا عَلَيْهِم مُّؤْصَدَةٌۭ
वह उनपर ढाँककर बन्द कर दी गई होगी,
فِى عَمَدٍۢ مُّمَدَّدَةٍۭ
लम्बे-लम्बे स्तम्भों में
Surah 105: Al-Fil — الفيل
أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِأَصْحَٰبِ ٱلْفِيلِ
क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे रब ने हाथीवालों के साथ कैसा बरताव किया?
أَلَمْ يَجْعَلْ كَيْدَهُمْ فِى تَضْلِيلٍۢ
क्या उसने उनकी चाल को अकारथ नहीं कर दिया?
وَأَرْسَلَ عَلَيْهِمْ طَيْرًا أَبَابِيلَ
और उनपर नियुक्त होने को झुंड के झुंड पक्षी भेजे,
تَرْمِيهِم بِحِجَارَةٍۢ مِّن سِجِّيلٍۢ
उनपर कंकरीले पत्थर मार रहे थे
فَجَعَلَهُمْ كَعَصْفٍۢ مَّأْكُولٍۭ
अन्ततः उन्हें ऐसा कर दिया, जैसे खाने का भूसा हो
Surah 106: Quraish — قريش
لِإِيلَٰفِ قُرَيْشٍ
कितना है क़ुरैश को लगाए और परचाए रखना,
إِۦلَٰفِهِمْ رِحْلَةَ ٱلشِّتَآءِ وَٱلصَّيْفِ
लगाए और परचाए रखना उन्हें जाड़े और गर्मी की यात्रा से
فَلْيَعْبُدُوا۟ رَبَّ هَٰذَا ٱلْبَيْتِ
अतः उन्हें चाहिए कि इस घर (काबा) के रब की बन्दगी करे,
ٱلَّذِىٓ أَطْعَمَهُم مِّن جُوعٍۢ وَءَامَنَهُم مِّنْ خَوْفٍۭ
जिसने उन्हें खिलाकर भूख से बचाया और निश्चिन्तता प्रदान करके भय से बचाया
Surah 107: Al-Ma'un — الماعون
أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يُكَذِّبُ بِٱلدِّينِ
क्या तुमने उसे देखा जो दीन को झुठलाता है?
فَذَٰلِكَ ٱلَّذِى يَدُعُّ ٱلْيَتِيمَ
वही तो है जो अनाथ को धक्के देता है,
وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ
और मुहताज के खिलाने पर नहीं उकसाता
فَوَيْلٌۭ لِّلْمُصَلِّينَ
अतः तबाही है उन नमाज़ियों के लिए,
ٱلَّذِينَ هُمْ عَن صَلَاتِهِمْ سَاهُونَ
जो अपनी नमाज़ से ग़ाफिल (असावधान) हैं,
ٱلَّذِينَ هُمْ يُرَآءُونَ
जो दिखावे के लिए कार्य करते हैं,
وَيَمْنَعُونَ ٱلْمَاعُونَ
और साधारण बरतने की चीज़ भी किसी को नहीं देते
Surah 108: Al-Kauthar — الكوثر
إِنَّآ أَعْطَيْنَٰكَ ٱلْكَوْثَرَ
निश्चय ही हमने तुम्हें कौसर प्रदान किया,
فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَٱنْحَرْ
अतः तुम अपने रब ही के लिए नमाज़ पढ़ो और (उसी के दिन) क़़ुरबानी करो
إِنَّ شَانِئَكَ هُوَ ٱلْأَبْتَرُ
निस्संदेह तुम्हारा जो वैरी है वही जड़कटा है
Surah 109: Al-Kafirun — الكافرون
قُلْ يَٰٓأَيُّهَا ٱلْكَٰفِرُونَ
कह दो, "ऐ इनकार करनेवालो!"
لَآ أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ
मैं वैसी बन्दगी नहीं करूँगा जैसी बन्दगी तुम करते हो,
وَلَآ أَنتُمْ عَٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ
और न तुम वैसी बन्दगी करनेवाले हो जैसी बन्दगी में करता हूँ
وَلَآ أَنَا۠ عَابِدٌۭ مَّا عَبَدتُّمْ
और न मैं वैसी बन्दगी करनेवाला हूँ जैसी बन्दगी तुमने की है
وَلَآ أَنتُمْ عَٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ
और न तुम वैसी बन्दगी करनेवाला हुए जैसी बन्दगी मैं करता हूँ
لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِىَ دِينِ
तुम्हारे लिए तूम्हारा धर्म है और मेरे लिए मेरा धर्म!"
Surah 110: An-Nasr — النصر
إِذَا جَآءَ نَصْرُ ٱللَّهِ وَٱلْفَتْحُ
जब अल्लाह की सहायता आ जाए और विजय प्राप्त हो,
وَرَأَيْتَ ٱلنَّاسَ يَدْخُلُونَ فِى دِينِ ٱللَّهِ أَفْوَاجًۭا
और तुम लोगों को देखो कि वे अल्लाह के दीन (धर्म) में गिरोह के गिरोह प्रवेश कर रहे है,
فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَٱسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ تَوَّابًۢا
तो अपने रब की प्रशंसा करो और उससे क्षमा चाहो। निस्संदेह वह बड़ा तौबा क़बूल करनेवाला है
Surah 111: Al-Masad — المسد
تَبَّتْ يَدَآ أَبِى لَهَبٍۢ وَتَبَّ
टूट गए अबू लहब के दोनों हाथ और वह स्वयं भी विनष्ट हो गया!
مَآ أَغْنَىٰ عَنْهُ مَالُهُۥ وَمَا كَسَبَ
न उसका माल उसके काम आया और न वह कुछ जो उसने कमाया
سَيَصْلَىٰ نَارًۭا ذَاتَ لَهَبٍۢ
वह शीघ्र ही प्रज्वलित भड़कती आग में पड़ेगा,
وَٱمْرَأَتُهُۥ حَمَّالَةَ ٱلْحَطَبِ
और उसकी स्त्री भी ईधन लादनेवाली,
فِى جِيدِهَا حَبْلٌۭ مِّن مَّسَدٍۭ
उसकी गरदन में खजूर के रेसों की बटी हुई रस्सी पड़ी है
Surah 112: Al-Ikhlas — الإخلاص
قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ
कहो, "वह अल्लाह यकता है,
ٱللَّهُ ٱلصَّمَدُ
अल्लाह निरपेक्ष (और सर्वाधार) है,
لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ
न वह जनिता है और न जन्य,
وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدٌۢ
और न कोई उसका समकक्ष है।"
Surah 113: Al-Falaq — الفلق
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ
कहो, "मैं शरण लेता हूँ, प्रकट करनेवाले रब की,
مِن شَرِّ مَا خَلَقَ
जो कुछ भी उसने पैदा किया उसकी बुराई से,
وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ
और अँधेरे की बुराई से जबकि वह घुस आए,
وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّٰثَٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ
और गाँठो में फूँक मारने-वालों की बुराई से,
وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
और ईर्ष्यालु की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।"
Surah 114: An-Nas — الناس
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ
कहो, "मैं शरण लेता हूँ मनुष्यों के रब की
مَلِكِ ٱلنَّاسِ
मनुष्यों के सम्राट की
إِلَٰهِ ٱلنَّاسِ
मनुष्यों के उपास्य की
مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ
वसवसा डालनेवाले, खिसक जानेवाले की बुराई से
ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ
जो मनुष्यों के सीनों में वसवसा डालता हैं
مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ
जो जिन्नों में से भी होता हैं और मनुष्यों में से भी